रामलला के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी: एसआईटी जांच में सामने आए कई अहम खुलासे

a9b0fd5d-89e3-4ebb-a529-b1d8951b008a

Alleged irregularities in Ram Lalla's offerings

अयोध्या। Alleged irregularities in Ram Lalla's offerings, रामलला के चढ़ावे में निरंतर चोरी कर रहे गणनाकर्मी अभ्यस्त अपराधी की तरह व्यवहार करते थे। वे गोपनीय कक्ष में गणना करते समय न तो किसी की ओर देखते थे, न ही बातचीत करते थे। कभी-कभार जब पार्टी करते थे, तब ही मौजमस्ती होती थी।

शांत रह कर यह प्रदर्शित किया जाता था कि उनमें कोई घनिष्ठता नहीं है। व्यवहार ऐसा था कि जैसे वे आपस में परिचित ही नहीं हों। यह सब इसलिए होता था, जिससे किसी को शक न हो। सब कुछ तय रहता था कि कैसे नकदी चुराकर बाथरूम या अन्य स्थान पर छिपानी है और इसे सुरक्षाकर्मियों की नजर से बचा कर ले जाना है।

शुरुआत में होती थी विधिवत चेकिंग पर बाद में रोकी गई

पूर्व में गणना में शामिल रहे बैंक के एक कैशियर ने एसआईटी को बताया है कि पहले तो एसआईएस के सुरक्षाकर्मी विधिवत जांच करते थे। गणना कर्मियों को दूसरे कपड़े पहनाए जाते थे, लेकिन बाद में यह व्यवस्था किसी के कहने पर बदल गई।

daan peti

फाइल फोटो दान पात्र।

एसआईटी के सामने बैंक के एक कैशियर ने दिया बयान, टिन्न के नाम से चेकिंग नहीं

सूत्रों ने बताया कि इस कैशियर का कहना था कि मंदिर परिसर में चार व्यक्तियों की चलती थी। दोनों ट्रस्टियों चंपतराय व अनिल मिश्र और व्यवस्थापक गोपाल राव के अलावा यदि किसी की हनक थी, तो वह टिन्नू यादव था। उसका नाम ले लेने से परिसर में कहीं भी जा सकते थे, कोई रोकता नहीं था। उसके पास वाकी-टाकी रहने से मदद भी कर देता था।

tinnu small pic

अधिक रकम पार करने पर की जाती थी पार्टी

दस गुणे 15 फीट के गणना कक्ष में सभी कर्मियों की मौजूदगी में 10 सीसी कैमरों के सामने मेज पर दानपात्रों से नकदी व सिक्के निकाले जाते थे। ट्रस्ट व बैंक कर्मी उपस्थित रहते थे। फिर इनकी शार्टिंग होती थी, बाद में गिनती करके बंडलिंग। सिक्कों को झोले में रखा जाता था। उसने बताया कि काउंटिंग रूम तक पहुंचने से पहले कई चरणों की जांच से गुजरना पड़ता था।

तलाशी के बाद होती थी जांच

मुख्य गेट पर पुलिस की तलाशी, हुंडी कार्यालय में दोबारा जांच, उपस्थिति दर्ज कराना, मोबाइल व निजी सामान लाकर में जमा कराना और विशेष ड्रेस पहनना अनिवार्य था। फिर एसआईएस सुरक्षाकर्मी पहचान का मिलान करके प्रवेश देते थे। पूरी प्रक्रिया कैमरे की निगरानी में होती थी। नोटों की गिनती पूरी होने के बाद इसे रजिस्टर पर अंकित करके वाउचर बनाकर लोहे के कंटेनर में बैंक ले जाया जाता था।